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मैं देशवासियों को नमन करता हूं जिनकी वजह से महाकुंभ का सफल आयोजन हुआ – पीएम मोदी 

मैं देशवासियों को नमन करता हूं जिनकी वजह से महाकुंभ का सफल आयोजन हुआ – पीएम मोदी 

महाकुंभ में हमने अपनी राष्ट्रीय चेतना के जागरण के विराट दर्शन किए – पीएम 

लोग सुविधा-असुविधा की चिंता छोड़कर महाकुंभ में हुए शामिल – पीएम मोदी 

नई दिल्ली। पीएम मोदी मंगलवार को लोकसभा में महाकुंभ के आयोजन पर बोले। उन्होंने इस दौरान इस आयोजन में योगदान देने वालों का धन्यवाद किया।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘आज मैं इस सदन के माध्यम से देशवासियों को नमन करता हूं जिनकी वजह से महाकुंभ का सफल आयोजन हुआ है। महाकुंभ की सफलता में अनेक लोगों का योगदान है.. मैं सभी कर्मयोगियों का अभिनंदन करता हूं। मैं देश भर के श्रद्धालुओं, उत्तर प्रदेश व विशेष रूप से प्रयागराज की जनता का धन्यवाद करता हूं।”

पीएम ने कहा कि पिछले वर्ष अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह ने हम सभी को यह अहसास कराया कि देश अगले 1000 वर्षों के लिए कैसे तैयार हो रहा है। इस वर्ष महाकुंभ ने हमारी सोच को और मजबूत किया है, तथा देश की सामूहिक चेतना हमें देश के सामर्थ्य के बारे में बताती है।

पीएम ने कहा, “मानव जीवन के इतिहास में ऐसे कई मोड़ आते हैं, जो पीढ़ियों को दिशा देते हैं।” पीएम मोदी ने महाकुंभ पर बोलते हुए कहा कि आयोजन के दौरान लोग सुविधा-असुविधा की चिंता छोड़कर इसमें शामिल हुए। पीएम ने कहा कि पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे संस्कारों के आगे बढ़ने का क्रम जारी है। आज भारत का युवा अपनी परंपरा अपनी आस्था और परंपरा को गर्व के साथ अपना बना रहा है। एक देश के रूप में हम बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने का भरोसा बढ़ा। अपने विरासत से जुड़ने की परंपरा आज के भारत की सबसे बड़ी पूंजी है।

पीएम मोदी ने कहा कि युवा पीढ़ी भी पूरे भाव से महाकुंभ से जुड़ी। महाकुंभ पर सवाल उठाने वालों को जवाब मिला है। देश के कोने-कोने में आध्यात्मिक चेतना उभरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाकुंभ को भारत के इतिहास में अहम मोड़ करार देते हुए मंगलवार को लोकसभा में कहा कि दुनिया ने देश के विराट स्वरूप को देखा और यह ‘सबका प्रयास’ का साक्षात स्वरूप था। उन्होंने निचले सदन में प्रयागराज महाकुंभ को लेकर दिए एक वक्तव्य में यह भी कहा कि महाकुंभ से ‘एकता का अमृत’ और कई अन्य अमृत निकले हैं।

उनका कहना था, ‘‘मैं देश के श्रद्धालुओं, उत्तर प्रदेश की जनता और विशेषकर प्रयागराज की जनता का धन्यवाद करता हूं।’’ उन्होंने कहा कि जिस तरह से गंगा को लाने के लिए भगीरथ प्रयास हुआ था उसी तरह का महाप्रयास महाकुंभ में दिखाई दिया। प्रधानमंत्री का कहना था, ‘‘मैंने लाल किले से ‘सबका प्रयास’ पर जोर दिया था। पूरे विश्व ने महाकुंभ के माध्यम से भारत के विराट स्वरूप के दर्शन किए। ‘सबका प्रयास’ का यही साक्षात स्वरूप है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘महाकुंभ में हमने अपनी राष्ट्रीय चेतना के जागरण के विराट दर्शन किए हैं। यह हमें नए संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रेरित करती है।’’ मोदी ने कहा, ‘‘महाकुंभ ने उन शंकाओं और आशंकाओं को उचित जवाब दिया है जो हमारे सामर्थ्य को लेकर कुछ लोगों के मन में रहती हैं।’’

उन्होंने कहा कि महाकुंभ से अनेक अमृत निकले हैं और एकता का अमृत इसका बहुत पवित्र प्रसाद है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ ऐसा आयोजन रहा जिसमें देश के हर क्षेत्र से, हर कोने से आए लोग एक हो गए और ‘अहम्’ त्याग कर ‘वयम्’ के भाव से प्रयागराज में जुटे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘देश के इतिहास में कई ऐसे पल आए हैं जिन्होंने देश को नई दिशा दी और देश को झकझोर कर जागृत कर दिया।’’

मोदी ने स्वामी विवेकानंद के शिकागो सर्वधर्म सम्मेलन में दिए गए भाषण, गांधीजी के ‘दांडी मार्च’ और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ‘दिल्ली चलो’ का नारा देने जैसे ऐतिहासिक अवसरों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘मैं प्रयागराज महाकुंभ को भी ऐसे ही एक अहम पड़ाव के रूप में देखता हूं जिसमें जागृत होते भारत का प्रतिबिंब दिखा।’’

उन्होंने अपनी हालिया मॉरीशस यात्रा का जिक्र करते हुए बताया, ‘‘मैं पिछले सप्ताह त्रिवेणी का पवित्र जल मॉरीशस लेकर गया था, जब उस जल को वहां के गंगा तालाब में प्रवाहित किया गया तो वहां बहुत ही उत्साह और आस्था का माहौल था।’’ प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा कि महाकुंभ से प्रेरणा लेते हुए हमें नदी उत्सव की परंपरा को नया विस्तार देना होगा, हमें इस बारे में जरूर सोचना चाहिए जिससे वर्तमान पीढ़ी को पानी का महत्व समझ में आएगा और नदियों की साफ-सफाई के साथ-साथ नदियों की रक्षा भी होगी। उन्होंने कहा कि भारत की नई पीढ़ी महाकुंभ से जुड़ी और यह युवा पीढ़ी आज गर्व के साथ अपनी आस्था और परंपराओं को अपना रही है।

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