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नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्यपाल के अभिभाषण को बताया निराशाजनक और दिशाहीन

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्यपाल के अभिभाषण को बताया निराशाजनक और दिशाहीन

यशपाल आर्य ने कहा, अपने लंबे जीवन में उन्होंने इतना कमजोर और वास्तविकता से कटा हुआ अभिभाषण पहले कभी नहीं सुना

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इसे निराशाजनक, दिशाहीन, संकल्पविहीन और विकास विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि अपने लंबे सार्वजनिक और संसदीय जीवन में उन्होंने इतना कमजोर और वास्तविकता से कटा हुआ अभिभाषण पहले कभी नहीं सुना।

यशपाल आर्य ने कहा कि यह अभिभाषण “सफेद कागज पर झूठ की काली स्याही से लिखी गई इबारत” जैसा है। इसमें प्रदेश की वास्तविक समस्याओं, जनता की पीड़ा और राज्य के सामने खड़ी चुनौतियों का कहीं भी उल्लेख नहीं दिखाई देता।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की प्राथमिकताओं, नीतियों और लक्ष्यों का दस्तावेज होता है और इसमें पिछले वर्ष की उपलब्धियों का भी उल्लेख होता है। लेकिन इस बार सरकार ने यह बताने की आवश्यकता भी नहीं समझी कि पिछले चार वर्षों में निर्धारित लक्ष्यों में से कितने पूरे हुए और कितने अधूरे रह गए।

आर्य ने कहा कि वर्ष 2022 में भाजपा सरकार बनने के बाद यह राज्यपाल का पाँचवाँ अभिभाषण है, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी सरकार के पास बताने के लिए ठोस उपलब्धियाँ नहीं हैं। सरकार हर वर्ष अपने लक्ष्य बदल देती है या अपने ही घोषित लक्ष्यों से पीछे हट जाती है। यही कारण है कि प्रदेश को उपलब्धियों के नाम पर कुछ भी ठोस नहीं मिल पा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार इस वर्ष भी अपनी प्रमुख उपलब्धि के रूप में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने का दावा कर रही है। सरकार के अनुसार इस कानून के अंतर्गत 5 लाख 27 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन आर्य का आरोप है कि इनमें से अधिकांश आवेदन सरकारी कर्मचारियों के हैं, जिन्हें प्रशासनिक दबाव या वेतन रोकने के भय से पुराने विवाहों का पुनः पंजीकरण कराने के लिए बाध्य किया गया है।

उन्होंने कहा कि यूसीसी में लिव-इन रिलेशन से जुड़े प्रावधानों के दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। लिव-इन संबंधों में रह रही युवतियों की हत्या की घटनाएँ तथा बच्चों के जन्म के बाद महिलाओं को परित्यक्त छोड़ देने जैसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि यह कानून राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। इससे जनसांख्यिकीय परिवर्तन की आशंकाएँ भी पैदा हो रही हैं।

आर्य ने अभिभाषण में किए गए “लखपति दीदी” संबंधी दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार का दावा है कि प्रदेश में ढाई लाख महिलाएँ लखपति बन चुकी हैं। यदि यह दावा सही है तो सरकार इन महिलाओं की सूची सार्वजनिक करे। उनका आरोप है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के बजाय उन्हें कर्ज के बोझ तले दबा दिया गया है।

उन्होंने पर्यटन और चारधाम यात्रा व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका कहना है कि सरकार शीतकालीन यात्रा को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि पिछले दो यात्रा सीजन में अव्यवस्था और कुप्रबंधन के कारण होटल व्यवसायी, टैक्सी चालक, घोड़ा-खच्चर संचालक और छोटे व्यापारी प्रभावित हुए हैं।
आर्य ने कहा कि बागवानी और कृषि योजनाओं में भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। सब्सिडी और प्रोत्साहन के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन कई किसानों को अपनी लागत तक नहीं मिल पाई, जिससे वे आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार चार वर्षों की वास्तविक उपलब्धियाँ बताने के बजाय वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र और विकसित प्रदेश बनाने जैसे दूरगामी नारों के माध्यम से जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। वर्तमान समस्याओं का समाधान किए बिना दूर के सपने दिखाना केवल जनता को भ्रमित करना है।
आर्य ने कहा कि इस अभिभाषण को “विजन डॉक्यूमेंट” के बजाय “कन्फ्यूजन डॉक्यूमेंट” कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। उनका कहना है कि उत्तराखंड की जनता अब सरकार के दावों और वास्तविकता के बीच का अंतर समझ चुकी है और समय आने पर इसका जवाब देगी।

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