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इयरफोन की लत बना सकती है आपको बहरा, समय रहते हो जायें सावधान

इयरफोन की लत बना सकती है आपको बहरा, समय रहते हो जायें सावधान

आज के स्मार्टफोन और डिजिटल गैजेट्स के दौर में इयरफोन और हेडफोन हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुके हैं। कामकाज, पढ़ाई, मनोरंजन या सफर—हर जगह इनका इस्तेमाल आम हो गया है। लेकिन जिस सुविधा ने जीवन को आसान बनाया है, वही आदत अगर लापरवाही से अपनाई जाए तो सुनने की क्षमता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

तेज आवाज से बढ़ता बहरापन का खतरा

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक तेज आवाज में इयरफोन या हेडफोन लगाने से कान के अंदर मौजूद बेहद संवेदनशील कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। खासतौर पर 85 डेसिबल से अधिक की आवाज को लगातार सुनना सुनने की शक्ति को धीरे-धीरे कमजोर करता है। इस स्थिति को ‘नॉइज-इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस’ कहा जाता है, जो अक्सर स्थायी होती है।

धीरे-धीरे उभरते हैं लक्षण

बहरापन किसी एक दिन में नहीं होता। शुरुआत में कान में भारीपन, सीटी जैसी आवाज, या बातचीत के दौरान शब्द साफ न सुनाई देना जैसे संकेत दिखते हैं। अगर इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, तो कम उम्र में ही गंभीर श्रवण समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

इयरफोन से कानों को कैसे पहुंचता है नुकसान

इयरबड्स सीधे कान की नली में फिट होते हैं, जिससे ध्वनि और कान के पर्दे के बीच कोई दूरी नहीं रहती। तेज आवाज का सीधा दबाव अंदर मौजूद तरल और नसों को प्रभावित करता है। लगातार ऐसा होने पर सुनने वाली नसें कमजोर हो जाती हैं और सामान्य आवाजें भी अस्पष्ट लगने लगती हैं।

कानों की सुरक्षा का आसान उपाय: 60/60 नियम

विशेषज्ञों की सलाह है कि हेडफोन या इयरफोन का इस्तेमाल करते समय ‘60/60 नियम’ अपनाना चाहिए। यानी, वॉल्यूम को अधिकतम 60 प्रतिशत से ऊपर न रखें और लगातार 60 मिनट से ज्यादा इस्तेमाल न करें। हर घंटे के बाद 10–15 मिनट का ब्रेक देना कानों के लिए जरूरी है, ताकि वे खुद को रिकवर कर सकें।

इयरफोन या हेडफोन—कौन सा बेहतर?

स्वास्थ्य के लिहाज से ओवर-द-इयर हेडफोन को इयरबड्स से थोड़ा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि वे कान के पर्दे से कुछ दूरी पर रहते हैं और बाहरी शोर को भी कम करते हैं। इससे तेज वॉल्यूम की जरूरत कम पड़ती है। हालांकि, गलत इस्तेमाल दोनों ही मामलों में नुकसानदायक हो सकता है।

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

अगर कान में दर्द, झनझनाहट, बार-बार आवाज समझने में परेशानी या बातचीत के दौरान शब्द गुम हो जाने जैसी दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत इयरफोन का इस्तेमाल कम करें और विशेषज्ञ से सलाह लें। याद रखें, सुनने की शक्ति एक बार चली जाए तो उसे वापस पाना बेहद मुश्किल होता है।

निष्कर्ष:
डिजिटल दुनिया में रहते हुए तकनीक से दूरी बनाना मुश्किल है, लेकिन थोड़ी सावधानी और सही आदतें अपनाकर हम अपनी सुनने की अनमोल शक्ति को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।

(यह लेख सामान्य मेडिकल जानकारियों और विशेषज्ञ सलाह पर आधारित है।)

(साभार)

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